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Saturday, December 10, 2011

फॉर्मूला वर्सेस एंटरटेनमेंट

दो बातें याद आ रही हैं। एक पिछले हफ्ते आई डर्टी पिक्चर का
डायलॉग, फिल्म सिर्फ तीन चीजों से चलती है एंटरटेनमेंट,
एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट। दूसरी बात कुछ महीने पुरानी है।
भास्कर ऑफिस नो वन किल्ड जेसिका के डायरेक्टर राजकुमार
गुप्ता आए थे। उन्होंने कहा था कि मैं नहीं चाहता कि मेरी दूसरी
फिल्म देखकर लोगों को पहली की और तीसरी देखकर दूसरी फिल्म की
याद आए।

लेडीज वर्सेस रिकी बहल देखकर बार-बार बैंड-बाजा-बारात की याद
आती है। और इस याद के साथ ध्यान आता है यशराज फलसफा,
एंटरटेनमेंट और स्टाइल का फॉर्मूला। मगर इसके साथ वर्सेस में
है नयापन, जो इस फिल्म से मिसिंग है। लेडीज वर्सेस रिकी बहल जिसे हम
शॉर्ट में एलवीआरवी कहेंगे, फर्स्ट हाफ में कुछ गुदगुदाती है
थैंक्स टु हबीब फैजल के लिखे विटी और करारे डायलॉग, मगर
सेकंड हाफ दोहराव से भरा और बोरिंग लगता है। इसमें राहत के
नाम पर सिर्फ रणवीर की सर्फिंग के दौरान और बाद दिखाई गई
मैटेलिक शेड बॉडी और अनुष्का शर्मा का खूबसूरत बिकनी सीन ही
है। एलवीआरवी देखिए, अगर देखने को कुछ और नहीं है और वाकई
टाइम पास के लिए पस्त हुए जाते हैं।

कुछ चुके हुए फॉर्मूले

शाद अली की फिल्म थी बंटी-बबली। रानी की एंट्री होती है
धड़क-धड़क धुंआ उठाए रे गाने से। एलवीआरवी में अनुष्का मुंबई
की गलियों में बच्चों के साथ क्रिकेट खेलती हैं, गाना गाती हैं,
फिर प्लेटफॉर्म पर डब्बे वालों के साथ ठुमके लगाती हैं। यहीं से
फिल्म की कहानी खिंचने लगती है। उससे पहले फस्र्ट हाफ में भी
रणवीर मैं हूं आदत से मजबूर गाने में रैप की रेग्युलर हो चुकी
स्टाइल दिखाते हैं। इसी तरह लास्ट में ग्रैंड स्टेड पर नीली-लाल
रोशनी के बीच पार्टी गाना और उसके दौरान रणवीर-अनुष्का का
लिपलॉक हो या फिर दिल्ली की लड़की डिंपल के बहाने वहां के
सिग्नेचर टॉकिंग टोन के जरिए हंसाने की कोशिश, नयापन मिसिंग
ही रहता है।

कॉनमैन को जब प्यार आता है, तो धूम2 के ऋतिक और ऐश आने लगते
हैं, जहां एक तरफ प्रफेशनल कमिटमेंट है, तो दूसरी तरफ
प्यार। वहां तो फिर भी चोरी का रोमांच है, यहां तो मामला लैट
ही है। इस फिल्म की स्टोरी लिखी है आदित्य चोपड़ा ने, जिनका बैनर
पहले बंटी और बबली और धूम फ्रेंचाइजी बना चुका है। यकीन नहीं
आता कि इसी आदी ने इस देश को मुहब्बत का नया मुहावरा डीडीएलडी
और मुहब्बतें के जरिए दिया था। स्टोरी रुटीन थी, तो फिर मनीष
शर्मा का डायरेक्शन या फिर हबीब के डायलॉग कितना खींचते।
अमिताभ भट्टाचार्य के गाने भी बहुत कमाल नहीं दिखा पाए। शायद फिल्म
की टोन ध्यान में रखकर उन्हें हल्के मिजाज के गाने लिखने को कहा
गया हो। मगर सिंपल शब्दों में हर एक फ्रेंड जरूरी होता है भी तो
उन्होंने ही लिखा है न।

तो कुछ अच्छा भी है क्या

एक पुराना फॉर्मूला इस बार भी अच्छा लगा है। थोड़ी चब्बी और
पंजाबी बिजनेसमैन की बेटी यानी डिंपल चड्ढा के रोल में परणीति
चोपड़ा कमाल करती हैं। फस्र्ट हाफ में उनकी वजह से फ्रेशनेस
बनी रहती है। इसके अलावा शार्प बिजनेस मैनेजर के रोल में दीपानिता
शर्मा भी ठीक लगी हैं।

बाकी सो कॉल्ड सितारों की बात करें, तो अनुष्का को अब ट्रैक
बदलने की जरूरत है। माना कि बबली गर्ल के रोल में वह बेहतर
करती हैं, मगर उसके बाद क्या। और रणवीर इमोशनल सीन में फनी
लगते हैं और एक्टिंग के लिहाज से इससे ज्यादा फूहड़ बात कुछ
नहीं हो सकती। रिकी बहल का किरदार बिट्टू शर्मा का वानाबी
अवतार ही लगता है। मगर रणवीर जी, हम सिनेमा हॉल में वॉलपेपर
नहीं, फिल्म देखने जाते हैं, जो मजेदार हो। इस बार पइसा फुल्टू
वसूल नहीं हुआ रणवीर-अनुष्का और मनीष-हबीब की जोड़ी से।

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